मंगदेछु जलविद्युत परियोजना क्या है?
मंगदेछू हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट, 720 मेगावाट की परियोजना का उद्घाटन भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनके भूटानी समकक्ष लोटे त्शेरिंग ने 2019 में संयुक्त रूप से किया था।
भारत सरकार ने इस जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की है।
इस पनबिजली परियोजना के शुरू होने से भूटान की बिजली उत्पादन क्षमता में 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और वर्तमान में यह 2,326 मेगावाट है।
चालू होने के बाद से, परियोजना ने 9,000 मिलियन यूनिट से अधिक ऊर्जा का उत्पादन किया है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में सालाना 2.4 मिलियन टन की कमी आई है।
परियोजना ने 2020 में देश के जलविद्युत राजस्व में 31 प्रतिशत की वृद्धि की। यह 2021 में भारत को 12.13 अरब रुपये की बिजली का निर्यात करेगा। इससे भूटान का बिजली निर्यात 24.43 अरब रुपये हो गया।
भारत-भूटान जलविद्युत संबंध
पनबिजली में द्विपक्षीय सहयोग 1961 में शुरू हुआ जब जलधका समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। जलधका परियोजना पश्चिम बंगाल में स्थित है, जिसमें संयंत्र से उत्पन्न जलविद्युत दक्षिणी भूटान को निर्यात किया जा रहा है।
भूटान की पहली मेगा बिजली परियोजना - 336 मेगावाट चूखा जलविद्युत परियोजना - पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित थी। इस परियोजना की सफलता ने भूटान में कई और मेगा जलविद्युत परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त किया।
चर्चा में क्यों?
हाल ही में भूटान में भारत की सहायता से निर्मित मंगदेछु जलविद्युत परियोजना (Mangdechhu Hydroelectric project) को सिविल इंजीनियरिंग में उत्कृष्टता के लिए प्रतिष्ठित ब्रुनेल पदक (Brunel Medal) से सम्मानित किया गया है।
मंगदेछु जलविद्युत परियोजना को यह पुरस्कार ब्रिटेन के इंस्टीट्यूट आफ सिविल इंजीनियर्स ने प्रदान किया है।
मंगदेछु जलविद्युत परियोजना के बारे में
मंगदेछु जलविद्युत परियोजना (Mangdechhu hydroelectric project), भूटान के ट्रोंगसा द्ज़ोंगखाग जिले में मंगदेछु नदी पर स्थित है।
इस परियोजना के निर्माण में लगभग 4,500 करोड़ रुपये की लागत आयी है। इस परियोजना को भारत द्वारा 70 प्रतिशत ऋण और 30 प्रतिशत अनुदान के माध्यम से वित्त पोषित किया गया है।
17 अगस्त,2019 को अपनी भूटान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 720 मेगावाट की मंगदेछु जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन किया था।
भारत-भूटान द्विपक्षीय जलविद्युत परियोजना सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय सहयोग के सबसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक ‘जलविद्युत/ पनबिजली विकास’(hydroelectric development) के महत्त्व को भारत एवं भूटान दोनों ने पहचाना है और जलविद्युत परियोजनाओं के विकास पर काफी बल दिया है।
भारत ने अब तक भूटान में इन प्रमुख परियोजनाओं को पूरा किया है- चुखा (Chukha) परियोजना, कुरिछू (Kurichhu) परियोजना , ताला (Tala) परियोजना और मंगदेछु (Mangdechhu) परियोजना।
जून , 2020 में भारत एवं भूटान ने खोलांगछू नदी पर खोलोंगछु जलविद्युत परियोजना (Kholongchhu Hydropower Project) हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किये। यह परियोजना 600 मेगावाट क्षमता वाली है।
भारत, भूटान में पुनात्सांगछू-1 (Punatsangchhu-1) एवं पुनात्सांगछू-2 (Punatsangchhu-2) जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं सहित अन्य परियोजनाओं को पूरा करने हेतु भी प्रयासरत है।
दोनों देशो के मध्य सनकोश जलाशय पनबिजली परियोजना पर जारी द्विपक्षीय बातचीत के जरिये परियोजना के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने पर कार्य किया जा रहा है।

